पुलित्ज़र पुरस्कार प्राप्त अख़बारों ने किस तरह छापी अपने को पुरस्कार मिलने की ख़बरें। सबसे पहले बात फोटोग्राफ विनर मैरी के अख़बार की जिसने इसे अंडर प्ले क्योंकि इसके संपादक रैंडी ब्रुबकर का मानना है कि पुरस्कार मिलने का मतलब ये नहीं कि हम कुछ ज्यादा ही खुश हो जाएं। मैरी हमेशा से अच्छा काम करती रही हैं। उनकी इस तस्वीर को अमेरिका की नेशनल प्रेस असोसिएशन की ओर से श्रेष्ठ पुरस्कार और SND भी सिल्वर मैडल दे चुका है। जब कि मैरी की इसी तस्वीर को एक अन्य अख़बार the Vien Dong Daily News ( a Vietnamese-language daily) ने पहले पेज पर जगह दी है। The San Francisco Chronicle को बेस्ट संपादकीय कार्टुन के लिए पुरस्कृत किया गया है। कार्टुनिस्ट Mark Fiore दफ्तर में जीत की खुशी मना रहे हैं। वाशिंगटन पोस्ट को अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग, फीचर राइटिंग, बेस्ट कमेंट और आलोचना के लिए चार पुरस्कार दिए गए है। WP में आदत के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति उपर हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बड़ा कमाल दिया है उसने पहले पेज पर ख़बर ही नहीं दी है जबकि उसने तीन अवार्ड जीते हैं। इनसाइट न्यूज का पाइंटर लगा है और उस पर मैटर है कि वाशिंगटन पोस्ट ने चार और न्यूयॉर्क टाइम्स ने चार पुरस्कार जीते हैं(देखें बक्सा)। सबके बारे में लिखना उबाऊ हो सकता है इसलिए राइट क्लिक कर नई विंडो खोलिए और पेज देख लीजिए। सुधि मित्रों की सुविधा के लिए ख़बर को लाल घेरा लगा दिया है।सुधि मित्रों की सुविधा के लिए ख़बर को लाल घेरा लगा दिया है।
बुधवार, अप्रैल 14, 2010
मंगलवार, अप्रैल 13, 2010
महिला फोटाग्राफर को मिला है इस बार का पुलित्ज़र अवार्ड
पुलित्ज़र पुरस्कारों की घोषणा हो गई। शहर से बाहर था इसलिए ख़बर नहीं दे सका माफी चाहता हूं। लेकिन दूसरे मीडिया माध्यमों ने ये ख़बर भिजवाई इसलिए सबको साधुवाद। इस बार फोटोग्राफी के लिए एक महिला को पुलित्ज़र पुरस्कार दिया गया है। ये सुनकर थोड़ा अचरच होता है। क्योंकि पत्रकारिता की दुनिया कम ही महिला फोटोग्राफर हैं। इस बार का पुरस्कार मैरी चिन्ड (Mary Chind ) को दिया गया है। मैरी The Des Moines Register में काम करती हैं और उनकी ये तस्वीर July 1, 2009 को छपी थी। इस तस्वीर के लेने की कहानी भी रोचक है। एक महिला को नदी में डूबने से सुरक्षा दल का जवान बचा रहा था। मैरी इसे कवर कर रही थीं मैरी तस्वीर लेने नदी में गईं लेकिन पानी में कैमरे की बैटरी और लैंस गिर गया। इससे मुसीबत और बढ़ गई। लेकिन मैरी कहां हार मानने वाली थी अपनी कार से एक और कैमरा लेकर आईं और तस्वीर ले ली। आदत के मुताबिक मैरी एक और कैमरा आपातकालीन स्थितियों के लिए रखती हैं और उस दिन वो ही कैमरा काम आया। मैरी दफ्तर पहुंचतीं, तब तक पहला पेज बनाने की तैयारी हो गई थी। जब संपादक ने मैरी की तस्वीर देखी तो तुरंत निर्णय लिया कि ये तस्वीर पेज वन पर पूरे कॉलम में जाएगी, और इस तरह मैरी की ये तस्वीर छपी और उन्हें पुलित्ज़र अवार्ड मिला। Wisconsin विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाली मैरी The Des Moines Register में सन 1999 से काम कर रही हैं। इससे पहले वे दो अन्य अख़बार The Sierra Vista Herald और The Tucson Citizen के साथ पारी खेल चुकी हैं।


यही है वो तस्वीर जिसके लिए मैरी को अवार्ड मिला है।
शनिवार, अप्रैल 10, 2010
15 अगस्त 1947 के अख़बार
शुक्रवार, अप्रैल 09, 2010
अब देखो कैसे कैसे छपने लगे हैं विज्ञापन
पश्चिमी देशों के अख़बार में अब ख़बरों से ज्यादा विज्ञापन को रोचक तरीके से पेश करने की होड़ मच गई है। वहां विज्ञापन के प्रस्तुतिकरण के नए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
देखते हैं पश्चिमी पत्रकारिता की दुनिया में विज्ञापन के लिए क्या क्या किया जा रहा है। भारत में विज्ञापन के लिए प्रयोग करने के लिए कोई मशहूर है तो वो टाइम्स ऑफ इंडिया है पिछले दिनों टाइम्स ने कार का विज्ञापन छापा था जिसके प्रथम चार या छह पेज कार की विशेषताएं थी। अख़बार का ऊपर का हिस्सा कार के आकार का कटा हुआ था। जिससे ये भ्रम होता था कि ये कार हर पेज पर है लेकिन वो कार थी प्रथम पेज पर (वो पेज मिला तो जल्द ब्लॉग्ा पर डाल दूंगा)। हां तो हम बात कर रहे थे पश्चिम की अख़बारी दुनिया में विज्ञापन की। पिछले महीने The Los Angeles Times ने एक फिल्म का विज्ञापन छापा। इसकी खासियत ये है कि प्रथम पेज पूरा वैसा का वैसा ही है बस इसमें एक चेहरा ऊपर से पेस्ट कर दिया गया है। जबकि असली पेज अंदर है। न्यूयॉर्क टाइम्स की वेबसाइट पर छपी ख़बर के अनुसार The Los Angeles Times के संपादक Russ Stanton और उनके कई सहयोगी इस तरह का विज्ञापन छापने के पक्ष में नहीं थे। क्योंकि The Los Angeles Times एक प्रतिष्ठित अख़बार है जिसमें ऐसा प्रयोग दुष्साहसपूर्ण है। जैसा भारत में होता है वैसा ही वहां भी हुआ मैनेजमेंट के आगे कौन क्या कर सकता है। अख़बार के मालिक ने संपादक को दरकिनार किया और अपने फायदे के लिए विज्ञापन छापा।
कनाडा में विंटर ओलंपिक गेम्स चल रहे हैं। इसके प्रयोजक भी नए नए तरीके से विज्ञापन दे रहे हैं। कनाडा के वेनकुवर शहर से निकलने वाले अख़बार The Province और The Vancouver Sun ने पूरे पेज पर बहुत सारी वाइट स्पेस छोड़ी है और एयर कनाडा का विज्ञापन छापा है। आप दोनों पेज देख सकते हैं किस तरह ‘एयर कनाडा’ ने अपने विज्ञापन को आकर्षक बना दिया है। कोई कुछ भी कर ले लोगों का ध्यान इस विज्ञापन पर जरूर जाएगा। वहीं अमेरिका से निकले वाले Tampa Bay Times (TBT) ने विज्ञापन की जगह प्रथम पेज और प्रथम पेज की जगह विज्ञापन रखा है। यही हाल Chikago Tribune ने भी यही किया और बड़ा सा नोट लिखा है आपका अख़बार अंदर है। हमारे देश में पश्चिमी पत्रकारिता में संपादकीय से जुड़ी अच्छी चीजें आने में कई दशक लग जाते हैं लेकिन विज्ञापन से संबंधित तरीके जल्द ही हमारे यहां आने वाले हैं। वो दिन दूर नहीं जब आप अपने किसी चहेते अख़बार का हाल ऐसा देखेंगे।
Content by न्यूयॉर्क टाइम्स वेबसाइट & न्यूजीयम
गुरुवार, अप्रैल 08, 2010
नक्सलवाद के खिलाफ दैनिक भास्कर का अभियान
नक्सलियों के हमले के बाद दैनिक भास्कर ने नक्सलवाद के खिलाफ एक मुहिम शुरू की है। जिसमें नक्सलियों की ताकत, क्षेत्र, कमजोरी और परिणाम जैसे मुद्दों पर रोज एक विशेष रपट छपेगी। आज इस शृंखला की पहली किस्त प्रथम पेज से प्रकाशित हुई है। ये रपट देश के सभी संस्करणों में प्रकाशित हो रही है।
बुधवार, अप्रैल 07, 2010
नक्सली हमले की कवरेज में हिंदी अख़बार आगे अंगरेजी पीछे
दैनिक भास्कर, नईदुनिया, टेलीग्राफ का बेहतरीन कवरेज
नक्सली हमले की ख़बर टीवी पर देखी, दिल दहल गया। सुबह घर आए अख़बार खुले तो अलग अलग प्रस्तुतिकरण पाया। सोचा देशभर के कुछ अख़बारों को टटोलें कैसे कवर किया है। सबसे पहले बात हिंदी अख़बारों की करते हैं विश्व के सबसे ज्यादा बिकने वाले जागरण के राष्ट्रीय संस्करण का शीर्षक है ‘नक्सली हमले से दहली दिल्ली’ मेरी कम पढ़ी लिखी पडोस वाली अम्मा के समझ नहीं आया। बोली हमला छत्तीसगढ़ में हुआ है दिल्ली में क्यों दहली, क्या कोई भूकंप आया है। फिर समझाया सरकार में चिंता बढ़ गई है। जागरण दिल्ली का लोकल एडिशन साफ साफ लिखता है ‘ग्रीन हंट का लाल जवाब’ समझ आ गया। हिंदुस्तान ने ग्राफिक्स बनाया और लिखा 76 जवान घेरकर मार डाले। अमर उजाला ने इसे सबसे बड़ा हमला बताते हुए 76 के शहीद होने की ख़बर दी। प्रस्तुतिकरण सराहनीय है। प्रभात ख़बर ने शहीदों की संख्या शीर्षक में गलत लिखी है। रांची एडिशन 86, पटना एडिशन ने 75 जवान शहीद लिखा है। वहीं प्रभात ख़बर के धनबाद संस्करण ने तो हेडर भी बदला है। नईदुनिया ने केंद्र सरकार के नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट पर कटाक्ष करते हुए शीर्षक दिया है ‘ खूनी रेड हंट’। नईदुनिया के रायपुर संस्करण ने शानदार प्रस्तुतिकरण किया है जो नईदुनिया के अन्य संस्करणों पर भारी पड़ रहा है। पत्रिका के चार संस्करण जबलपुर, इंदौर, भोपाल और जयपुर ने अलग अलग पेज बनाया है जिससे लगता है हर संस्करण ने अपने अपने अनुसार पेज वन बनाया है जबकि अधिकांश अख़बारों ने सेंट्रल डेस्क से बनाया हुआ थोड़ा बहुत फेरबदल कर छापा है। दैनिक भास्कर ने भी सबसे बड़ा नक्सली हमला शीर्षक से प्रथम पेज लेटा दिया है। लेकिन रायपुर संस्करण के लिए अपने शहर में हुई 27 लाख की डकैती जैसी बड़ी ख़बर को पहली जगह दी है। सभी अख़बारों ने एक या दो पेज नक्सलवाद पर बनाए हैं। भास्कर और नईदुनिया का छत्तीसगढ़ में नेटवर्क मजबूत है इसलिए इन अख़बारों अच्छे कॉन्टेंट के साथ दो दो अतरिक्त पेज बनाए हैं। अधिकांश अख़बारों में टेबल ड्राफ्ट की हुईं ख़बरें पढ़ने को मिली है। कई लोगों ने नक्सलियों से संबंधित ख़बर लिखी है लेकिन वे ख़बर छत्तीसगढ़ के किसी शहर से नहीं इंदौर,दिल्ली,पटना में बैठकर लिखी गई हैं। सोचिए दिल्ली का पत्रकार ये लिखे कि छत्तीसगढ़ में इन दिनों क्या हालात है तो हंसी नहीं छूटेगी।
अंगरेजी अख़बार
अंगरेजी अख़बारों के हेडिंग तो लाजवाब हैं किसी ने इसे नक्सलियों का कत्लेआम बताया है तो किसी ने लिखा है ‘जंगली’। सबसे बेहतरीन प्रस्तुति नक्सलियों से प्रभावित राज्य पं बंगाल के कोलकाता से प्रकाशित टेलीग्राफ ने दी है। टेलीग्राफ ने बकायदा ग्राफिक्स और हेडिंग लाजवाब है लिखा है SAVAGED जिसका अर्थ है ‘जंगली’ बेहद सटिक शीर्षक दिया है। अंगरेजी अख़बारों में भी प्रभात ख़बर की तरह गफलत पैदा की है। द हिंदू ने मरने वाला की संख्या 74 लिखी है, वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने 75, टाइम्स ऑफ इंडिया ने 74 जबकि टेलीग्राफ ने आकंडा सही लिखा है 76। टाइम्स ऑफ इंडिया की पहले पेज पर छपी लीड ख़बर की नई दिल्ली, हैदराबाद और भोपाल में बैठकर लिखी गई है याने भोपाल से किसी संवाददाता ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ख़बर लिखी है। इससे पता चलता है कि टाइम्स का छत्तीसगढ़ में कोई संवाददाता ही नहीं है। अंदर का एक स्पेशल पेज है उस पर भी रांची, भोपाल और नईदिल्ली से ख़बर लिखी है। किसी गेस्ट या एनजीओ वाले ने एक पीस तक छत्तीसगढ़ से नहीं लिखा है। टाइम्स ने इस पर संपादकीय भी लिखी है।
सोमवार, अप्रैल 05, 2010
ये ख़बर हमारे यहां नहीं छपती
न्यूयॉर्क के एक अख़बार में ख़बर छपी है कि एक झरने में फंसे दो साल के बच्चे को उसके पिता ने बचा लिया। जी हां ये ख़बर अगर हमारी यहां छपी होती तो शायद ही छपती। संपादकजी पूछते इसमें खास क्या है...बाप तो बेटे को बचाएगा ही...हां अगर कोई राहगीर या पराया व्यक्ति बच्चे को बचा लेता तो अनजान ने जान की बाजी लगाकर बचाई जान जैसा कोई शीर्षक देकर ख़बर छाप लेते। और ऐसे में अगर ये ख़बर किसी स्ट्रिंगर ने भेजी हो तो उसकी तो बारह बज जाती। डेस्क के लोग इतनी खरी खोटी सुनाते कि बेचारा ऐसी ख़बर लिखना ही भूल जाता। लेकिन न्यूयॉर्क से छपने वाले डेली न्यूज नाम के अख़बार ने अपने स्ट्रिंगर की ख़बर को न सिर्फ छापा बल्कि पहले पेज पर एक्सक्लूसिव लिखकर जगह भी दी। चार लाइन प्रथम पेज पर लिखी लेकिन ऐसी लिखी कि पूरी ख़बर समझ में आ गई। फोटो तो स्ट्रिंगर ने ऐसा लिया कि कमाल कर दिया। माना कि सारा न्यूज सेंस और ड्रामे का कमाल है लेकिन शीर्षक और फोटो इतना जोरदार है कि पाठक ख़बर जरूर पढ़ेगा।
एक दो कलर में बनते हैं अच्छे पेज और पैकेज
अक्सर देखता हूं कि बंधुवर जब पेज बनाते हैं तो कलर प्लेट पर बने सारे कलर अपने पैकेज या पेज पर डाल देते हैं। ऐसा लगता है होली का अख़बार है। कई अख़बार देखे हैं विदेशी ही नहीं देसी भी और अनुभव भी रहा है कि अगर एक या दो कलर से पूरा पेज या फिर पैकेज बनाया जाए तो मजा आ जाता है। पेज ऐसा उठता है कि स्टोरी में जान आ जाती है।
इस पेज को देखिए इसमें सिर्फ एक कलर का इस्तेमाल किया गया है। जिसे हम आसमानी कह सकते हैं पूरे पेज पर उसी कलर के शेड को कम ज्यादा कर इस्तेमाल किया गया है। कैसे उठ रहा है ये पेज। स्क्रीन बॉक्स, नीचे न्यूमेरिक का कलर भी वहीं इस्तेमाल किया गया है। स्पोर्ट्स वाला जिसमें नैक्स्ट लिखा है देखेंगे तो पता चलेगा इसमें भी दो एक ही कलर का इस्तेमाल हुआ कहीं 100 प्रतिशत है तो कहीं 20 प्रतिशत रंग का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा कुछ पेज भी डाल रहा हूं जिसमें एक या दो रंगों का बेहतरीन इस्तेमाल कर खूबसूरत पेज बनाए गए हैं। एक दो पेज अपने देश के अख़बार से भी है। जरूरी नहीं है कि इन पेजों का आइडिया लेकर पूरा पेज ही बनाया जाए। तीन चार या इससे अधिक कॉलम के पैकेज में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
शुक्रवार, अप्रैल 02, 2010
कैर्लिफोनिया से प्रकाशित Monterey County Weekly बंद, लेकिन चालू !
इधर हरियाणा से शुरू हुआ अख़बार ‘अभी-अभी’ बंद हुआ उधर कैर्लिफोनिया से प्रकाशित होने वाला Monterey County Weekly बंद हो गया। अख़बार ने कल याने एक अप्रैल के संस्करण में घोषणा कर दी कि वो अब अपना प्रिंट संस्करण नहीं छापेंगे बल्कि ख़बरें मोबाइल और वेब से उपलब्ध कराएंगे। 22 साल पुराने इस अख़बार ने अपने बंद होने की लीड ख़बर के साथ ये भी लिखा कि उसके इस फैसले कितने कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। अख़बार ने लिखा कि इससे उसके 26 पूर्णकालीन कर्मचारियों को गुलाबी पर्ची थमा दी गई जिसमें रिपोर्टर,कार्टुनिस्ट,संपादकीय से जुड़े लोग हैं। इसके अलावा 13 ड्राइवर, एक दर्जन प्रेस के कर्मचारी भी बेरोजगार हो गए है। हमें मोबाइल और वेब से ख़बर देने के लिए बहुत बड़े तामझाम की जरूरत नहीं है 26 लोगों का काम सिर्फ छह लोग करेंगे। इसके अलावा अख़बार ने यूट्यूब पर एक विडियो भी जारी किया है जिसमें वे अपने अनुभव और दुख को जाहिर कर रहे हैं।
अब आपको बताते हैं असली बात दरअसल लोगों का अप्रैल फूल बनाने के लिए Monterey County Weekly ने यह ड्रामा रचा था। पाठक तो सबसे बड़ा समझदार होता है वो इनके इरादे ताड़ गया और Monterey County Weekly की वेबसाइट पर धड़ाधड़ कमेंट आने लगे कि क्यों पागल बना रहे हो यार। लोग इसलिए ताड़ गए क्योंकि इससे पहले ये ड्रामा न्यूयॉर्क टाइम्स कर चुका है।
सोचो गुरु अपने यहां कोई बड़ा अख़बार ऐसा मजाक कर ले तो पूरी पत्रकार बिरादरी उसकी क्या हालत कर देगी...क्या क्या न कहेगी...’ ये पत्रकारिता के साथ मजाक है....ये पत्रकारिता का अपमान है....और न जाने क्या क्या।
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