Friday, February 03, 2012

दबंग में तीन फ्रंट पेज

अगर आपको किसी अखबार में तीन-तीन बार हेडर दिखे तो कैसा लगेगा। निश्चिततौर पर ये भारतीय मीडिया में आलोचना का विषय रहेगा, लेकिन बॉस प्रयोग मस्त है।
ऐसा ही प्रयोग दबंग दुनिया इंदौर ने किया है। उसने आज अपने अखबार में फं्रट पेज की तरह दो अतरिक्त पेज प्रादेशिक और देश-विदेश दिए हैं यानी कुल मिलाकर तीन फ्रंट पेज दिए हैं। इससे पहले दबंग फ्रंट और लास्ट पेज को एक जैसा बनाता था। फ्रंट पर लोकल खबरें आज भी जारी है, सेकेंड पर नेशनल खबरें होती थीं।
भारत में ऐसी शुरुआत मुंबई से प्रकाशित डीएनए (डेली न्यूज एंड एनालिसिस) ने की थी। उसने अपने हेडर लास्ट पेज  AND कर दिया था जो  DNA का उल्टा था, जिसका पंच था योर सेकेंड फ्रंट पेज।
दबंग ने प्रयोग बेहतरीन किया, क्योंकि लड़ाई दूसरों से अलग दिखने की भी है। फिर नाम भी तो दबंग है...अच्छे प्रयोग के लिए दबंग को बधाई।
 चाहें तो वेबसाइट पर विजिट कीजिए
http://www.epaperdainikdabangdunia.com/epapermain.aspx?queryed=9&eddate=02%2f03%2f2012







Monday, November 28, 2011

इंदौर में मुशायरे का बेमिसाल कवरेज

दो दिन पहले इंदौर में मुशायरा हुआ। मुशायरा क्या हुआ सभी अखबारों ने अपने  उर्दू के जानकार सुरमाओं को इसकी कवरेज पर लगा दिया। देर से शुरू हुए इस मुशायरे को पहले दिन आधा पेज तो कुछ ने फोटो देकर इस सूचना के साथ प्रकाशित किया कि फुल कवरेज अगले दिन।
इंदौर के अखबारों में मुशायरे को कितनी गंभीरता से लिया और उसका प्रकाशन किया यह आप देखकर ही अंदाजा लगा सकते हैं।  एक नई बात और थी कि अखबारों ने सिर्फ शे'र ही नहीं छापे बल्कि मुशायरे की समीक्षा भी की। यह अपने आप में मुशायरे की रिपोटर्िेंग का अच्छा उदाहरण है।







Friday, October 28, 2011

एफवन : टाइम्स की नकल कर रहे हिन्दी अखबार

आज कल एफवन इंडिया में हैं इसको लेकर अखबारों जमकर कामकाम हो रहा है। कोर्इ स्पेशल पेज निकाल रहा है तो कोई स्टोरीज कर रहा है, लेकिन इन सब में बाजी मारी है टाइम्स ऑफ इंडिया ने रोज एक से बढ़कर एक पेज देकर टाइम्स लीडर बना हुआ है। हिन्दी अखबारों का काम भी टाइम्स के भरोसे चल रहा है वे उसी के पन्ने ट्रंासलेट कर इसे स्पेशल कवरेज का नाम दे रहे हैं।



Friday, October 21, 2011

गद्दाफी का अंत और इंडिया-यूएई के अखबार

कर्नल गद्दाफी के खात्मे की खबर को अंगरेजी अखबारों ने तरजिह दी है। जबकि कई हिन्दी अखबार ने गद्दाफी की मौत को सिंगल कॉलम में ही निपटा दिया। हिन्दी अख़्ाबारों पर हंसी इसलिए आती है, जब लिबिया में क्रांति हो रही थी। आधे-आधे पेज और अंदर स्पेशल पन्ने बना रहे थे और जब क्रांति अपने मुकाम पर पहुंची तो उस क्रांति को डीसी भी मयस्सर नहीं हुई। हिन्दी अखबारों में भास्कर ने सम्मानजनक पैकेज दिया है, लेकिन पुष्य नक्षत्र के कारण बैनर की जगह छह कॉलम से ही संतोष करना पड़ा है। दिल्ली के सभी अखबारों में गद्दाफी लीड है, लेकिन जागरण के नेशनल एडिशन में पोप  की खबर लीड है।
इस बार यूएई के अखबार भी दे रहा हूं, क्योंकि अरब में गद्दाफी का दखल रहा है। वहां खलीज, नेशनल और गल्फ ने गद्दाफी को लीड बनाया है।




Monday, September 26, 2011

टीओआई में गजब का विज्ञापन





ऐसे ही टाइम्स ऑफ इंडिया को ट्रैंड सेटर नहीं कहा जाता है। वह हमेशा बिरला करता रहता है। आज का टाइम्स देखिए पूरा येलो-येलो है। विज्ञापन दाता कंपनी DHL को भी खुश कर दिया और उम्दा कंटेंट देकर रीडर को भी। लेआउट इस तरह से बनाया गया है कि रीडर को परेशानी न हो।