आईबीएन 7 ने चलाई मुहिम रंग लाई
कभी-कभी हम भी अख़बारों की दुनिया से हटकर चुटकियां ले लेते हैं। क्या आपको पता है रुचिका गिरहोत्रा हत्याकांड की मुहिम को आईबीएन 7 ने शुरू किया था। आईबीएन 7 के कारण ही सारी कार्रवाइयां हुई हैं। इसी चैनल ने लगातार ख़बरें दिखाई हैं। बाकी अख़बार और चैनल दिखा रहे हैं वो कुछ नहीं है। आज सुबह-सुबह आईबीएन 7 पर यही ख़बर चल रही थी। ब्रेकिंग न्यूज के साथ कि केंद्र ने सीबीआई को आदेश दिया है कि वो डीजीपी के खिलाफ अपील करे और डीजीपी राठौर के सारे मैडल ले ले । ये सब हुआ है आईबीएन 7 की ख़बर के कारण।
अब इस ख़बर पर हंसा जाए या..... ये आप तय करें।
शुक्रवार, दिसंबर 25, 2009
सोमवार, दिसंबर 14, 2009
नईदुनिया इंदौर में ख़बर के साथ रिपोर्टर की फोटो भी
नईदुनिया इंदौर अब अंगरेजी अख़बारों की तर्ज पर अपने रिपोर्टरों की तस्वीर और उनके इमेल के साथ ख़बरें छाप रहा है। नईदुनिया का ये प्रयोग खास ख़बरों के साथ ही हो रहा है। आज नईदुनिया में ख़बर छपी है कि बच्चे व्हाइटनर सुंघकर नशा करते हैं। ये ख़बर पुरानी है लेकिन ट्रीटमेंट नया है इसलिए इसे पहले पेज लीड के रूप में जगह दी गई है। नईदुनिया इंदौर प्रयोग के मामलों में अन्य संस्करणों से काफी आगे हैं। इससे पहले नईदुनिया पूरे पेज पर तिरछा हेडिंग लगाकर प्रयोग किया था।
रविवार, दिसंबर 06, 2009
सिंगल कलर में बेहतरीन पेज
कई दोस्त मिलते हैं कहते हैं यार सिंगल कलर में पेज अच्छा नहीं लगता। जब कलर का इस्तेमाल करना ही तो क्यों न खुलकर करें। ये बात सही है कि क्यों न खुलकर कलर कर इस्तेमाल किया जाए। लेकिन कलर का इस्तेमाल अख़बारों में ज्यादा करने से वो मैग्जीन जैसा लगने लगता है। कोशिश करें कि सिंगल या डबल कलर का इस्तेमाल करें। ब्लैक का अलग अलग शेड लेकर अख़बार बनाएंगे तो और भी बेहतरीन अख़बार बन सकता है। ब्लैक और रेड का कॉम्बिनेश बहुत उम्दा है। ब्लैक का इस्तेमाल करने के कई फायदें हैं। अगर अल्टर करना है तो सिर्फ एक कलर की प्लेट अल्टर करना पड़ेगी। ब्लैक जल्दी अल्टर भी होता है। अगर रंगों का इस्तेमाल कर अख़बार बनाओगे तो चारों प्लेट बदलना पड़ेगी। अख़बार लेट हो सकता है। ब्लैक में कोई भी ख़बर बदली जा सकती है, अगर करेक्शन भी है तो दूर हो जाएगा। फिर भी मेरा सुझाव है कि मित्रगण ऐसे कलर इस्तेमाल करें तो जो शेड का कॉम्बिनेशन हो ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से अल्टर किया जा सके। कुछ सिंगल कलर पेज मिले हैं तो सुधि मित्रों के काम आएंगे।
गुरुवार, दिसंबर 03, 2009
भोपाल गैस कांड की बरसी पर दैनिक भास्कर का ऐतिहासिक प्रयोग
भोपाल में भास्कर लगातार गैस पीडि़तों की आवाज को बढ़ा रहा है। आज दैनिक भास्कर को भोपाल संस्करण पूरा ब्लैक एंड वाइट है। भास्कर ने आज का अंक (पीडीएफ देखने के लिए क्लिक करें, सिर्फ प्रथम पेज) भोपाल गैस कांड में मारे गए लोगों को समर्पित करते हुए उनकी याद में ब्लैक एंड वाइट छापा है। पत्रकारिता के इतिहास में ये एक मिसाल है, काबिले तारीफ है। नवदुनिया याने नईदुनिया आज अंदर के पेजों पर सुस्त नजर आया है लेकिन प्रथम पेज भी गैस पीडि़तों को ही समर्पित है। पत्रिका और अन्य अख़बार एक दिन बाद जागे हैं। पत्रिका ने प्रथम पेज के अलावा अंदर दो पेज दे दिए हैं। प्रथम पेज पर पत्रिका के स्थानीय संपादक गिरीराज शर्मा की संपादकीय भी है। भोपाल गैस त्रासदी पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने आज ऑल एडिशन फ्रंट पेज और एक अतरिक्त पेज दिया है। शीर्षक है 25 YEARS OF SHAME ।

अमर उजाला का नया पेज खासमखास
आज से अमर उजाला ने एक नया पेज शुरू किया है जिसका नाम है खासमखास। इस पेज की खासियत ये है कि अमर उजाला नेटवर्क की श्रेष्ठ ख़बरें इस पेज पर आएंगीं। इस पेज की सभी ख़बरें बाइलाइन है एक ख़बर को छोड़कर। इससे लगता है ये पेज बाइलाइनों का पेज होगा जिसमें देशभर के अमर उजाला के रिपोर्टर छपेंगे। इस प्रयोग को अख़बार में अंतिम पेज दिया गया है। अमर उजाला का ये प्रयास प्रशंसनीय है क्योंकि पहले अमर उजाला का आखिरी पेज गॉसिप से भरा होता था, गॉसिप का पेज अंदर चला गया है।

बुधवार, दिसंबर 02, 2009
भोपाल के कई अख़बार भूल गए यूनियन कार्बाइड हादसे को
यूनियन कार्बाइड हादसे को 25 साल हो चुके हैं। लगा था सभी अख़बार दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी को बड़ा कवरेज देंगे, लेकिन भास्कर और नवदुनिया (नईदुनिया) को छोड़कर कोई भी अख़बार इस दर्द को समझ नहीं पाया। नवदुनिया और भास्कर ने तीन से चार पेज इस त्रासदी की 25वीं बरसी पर दिए हैं। सुनीता नारायणन की रिपोर्ट को सभी ने तवज्जो दी है। लेकिन पत्रिका, जागरण और राज एक्सप्रेस ये दर्द नहीं समझ सके। पत्रिका ने जरूर प्रथम पेज के अलावा दूसरा पेज दिया लेकिन वो भी आधा विज्ञापन सेभरा था। भास्कर और नवदुनिया के अच्छे कवरेज का कारण उसका स्थानीयपन है, जो यूनियन कार्बाइड त्रासदी को समझता है। जागरण के प्रथम पेज से यूनियन कार्बाइड बरसी की ख़बर ही गायब है। राज एक्सप्रेस का भी यही हाल है। कुल मिलाकर बाजी मारी नवदुनिया और भास्कर ने, दोनों के कॉन्टेंट भिन्न हैं,लेकिन ये कहना मुश्किल है भारी कौन रहा।


प्रथम पेज पर फोटो नहीं इलेक्ट्रेशन
मुझे हमेशा से इलेस्ट्रेशन बड़े पिक्चर लगाने का शौक रहा है। निजीतौर पर मेरा मानना है कि अख़बार एक बडे पिक्चर और इनफॉर्मेटिव इलेस्ट्रेशन से खिल उठता है। हमेशा लगता था कि कोई तो अख़बार होगा जो पहले पेज की शुरुआत इलेस्ट्रेशन से करता होगा। अंगरेजी अख़बारों में द टेलीग्राफ और हिंदी में दैनिक भास्कर ने पहले ऐसा प्रयोग किया था लेकिन ये साप्ताहिक था। हर रविवार को प्रथम पेज पर इलेक्ट्रेशन का प्रयोग किया जाता था। मुझे कुछ ऐसे अख़बार मिले हैं जो इलेक्ट्रेशन से ही शुरुआत करते हैं। दोस्तों के काम आएंगे।





सदस्यता लें
संदेश (Atom)





