सोमवार, सितंबर 26, 2011

टीओआई में गजब का विज्ञापन





ऐसे ही टाइम्स ऑफ इंडिया को ट्रैंड सेटर नहीं कहा जाता है। वह हमेशा बिरला करता रहता है। आज का टाइम्स देखिए पूरा येलो-येलो है। विज्ञापन दाता कंपनी DHL को भी खुश कर दिया और उम्दा कंटेंट देकर रीडर को भी। लेआउट इस तरह से बनाया गया है कि रीडर को परेशानी न हो।

गुरुवार, सितंबर 08, 2011

....और ये अखबार पाठक को मूर्ख समझते हैं

अपने आप को राष्ट्रीय अखबार कहने वाले जागरण और अमर उजाला ने जो छापा है वह बेहद निराशाजनक है। जब जुलाई में मुंबई पर हमला हुआ था तब भी और अब दिल्ली में हमला हुआ तभी, इन्होंने वहीं हेडिंग रिपीट किए हैं। यकीन न आए तो देख लीजिए। ये काहे के नेशनल जब हेडिंग पर ही मेहनत न हो। अरे या सबको मालूम है कि दिल्ली में हमला हुआ है और दिल्ली दहली है। अगर कॉपी करनी है तो टीवी चैनल्स की करनी चाहिए वहां एक से एक हेडिंग मिलते हैं।
पिछले हमले की पोस्ट देखिए :



हमलों का कवरेज : हिन्दी अखबारों ने किया अच्छा कवरेज


इस बार हमला दिल्ली पर हुआ है...१३ जुलाई को मुंबई में हुआ था। अखबारों ने कुछ नया नहीं किया है। हिन्दी अखबारों ने थोड़े अच्छे हेडिंग लगाए हैं। प्रभात ख़बर ने दिल जीता है। ...हम फिर लाचार... को इस तरह रंग दिया है कि लगे हमला और लाचार। हिन्दुस्तान ने अच्छा हेडिंग लगाया है धमकी देकर हमला
समझ नहीं आता है कि भास्कर का हेडिंग डीएनए गया है या डीएनए का हेडिंग भास्कर में आया है।
दैनिक जागरण के नेशनल एडिशन ने कमाल का हेडिंग दिया है न्याय की चौखत पर मिली मौत
नई दुनिया ने लिखा है अब दिल्ली लहूलुहान ये १४ जुलाई को छपे भास्कर की याद दिलाता है जिसमें छपा है हम फिर लहूलुहान
पत्रिका के जयपुर संस्करण ने हमले और भूकंप को जगह दी है शेष जगह दिल फिर छलनी परोसा है।
कवरेज सभी जगह ठीक है। ऐसा नहीं है कि कोई कमाल हो गया है दिल्ली में हमला हुआ है इसलिए टाइम्स ऑफ इंडिया टेरर रिटर्न नाम से अंदर के पन्ने भर दिए हैं। वहीं इकनॉमिक्स टाइम्स ने भी आज बिजनेस की जगह हमले को ही जगह दी है। 
इंडियन एक्सप्रेस ने कमाल का शीर्षक दिया है सिर्फ तारीख और प्लेस दिया है।
सभी अखबारों ने अंदर के पेज भर दिए हैं। मुंबर्इ के अखबारों को छोड़कर।
पिछले हमले की पोस्ट देखिए