गुरुवार, जून 11, 2009

टाइम्‍स के लिए ‘महान’ नहीं हबीब तनवीर



हबीब तनवीर, रंगमंच की पाठशाला जो अब बंद हो चुकी है। देशभर के अख़बारों ने तनवीर साहब को प्रथम पेज पर स्‍थान दिया लेकिन टाइम्‍स ऑफ इंडिया ऐसा अख़बार था जिसने न पहले पेज पर तनवीर साहब को स्‍थान दिया न ही दो या तीन पेज पर। टाइम्‍स ऑफ इंडिया के लिए छोटे-छोटे कपड़े पहनकर पेज थ्री पर छाने वाली शीतल मफतलाल ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण थी। इसके दिल्‍ली संस्‍करण में पेज नौ पर हबीब जी को जगह दी गई है वो भी बॉटम में। उस ख़बर में लिखा है One of India’s greatest
dramatists, Habib Tanvir died on Monday at the age of 85. एक तरफ महान कह रहे हो और दूसरी तरफ सम्‍मान नहीं दे रहे हो। टाइम्‍स ऑफ इंडिया के ही मुंबई संस्‍करण में और धमाल है। प्रथम पेज का आधा हिस्‍सा शीतल मफतलाल के नाम कर दिया गया है। मुंबई मायानगरी है। यहां कलाकारों का सम्‍मान होता है। फिर हबीब तनवीर ने तो बॉलीवुड के लिए भी काम किया है। उन्‍होंने फिल्‍मों की पटकथा, संवाद और गीत लिखे हैं। कुछ फिल्‍मों में तो अभिनय भी किया है। उनकी ताजा फिल्‍म ब्‍लैक एंड व्‍हाइट थी जो शो मैन सुभाष घई ने बनाई थी। खराब स्‍वास्‍थ्‍य के बावजूद भी हबीब तनवीर ने उसमें अभिनय किया था। तो मुंबई के टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने इस महान कलाकार को प्रथम पेज के लायक क्यों नहीं समझा? मुंबई टाइम्‍स के चौथे पेज पर वही कॉपी बॉटम में चस्‍पा है। मित्रों को बता दूं कि मध्‍यप्रदेश के सभी अख़बारों ने हबीब तनवीर को प्रथम पेज पर जगह देने के साथ एक पूरा पेज विशेष सामग्री के साथ दिया है। चाहे फिर वह नईदुनिया, दैनिक भास्‍कर, पत्रिका या फिर दूसरे अख़बार। टाइम्स के मुंबई संस्‍करण में एक पूरा पेज दिया गया है शीतल मफतलाल पर। वह है पेज दो। यहां दो बातें हो सकती हैं या तो प्रथम पेज बनाने वालों का न्‍यूज़ सेंस कमजोर है (छोटा मुंह बड़ी बात भी हो सकती है पर ऐसा कहने को मजबूर हूं ) या फिर टाइम्‍स ने यह पॉलिसी बना रखी है कि हबीब तनवीर जैसे फक्‍कड़ नाटकार को नहीं छापेंगे। ऐसा फक्कड़ जिसने चरणदास चोर जैसा उत्क्रष्ट नाटक रचा और देश की सबसे पुरानी नाट्य संस्‍था बनाई (जो जल्दी ही अपने 50 साल पूरे करने वाली है)। ऐसे फक्‍कड़ को जगह नहीं देना जिसने यूरोप में दो साल तक नाट्य विधाओं का अध्‍ययन किया और वहां के लिए काम किया या फिर ऐसा आदमी जिसे भारत सरकार ने पद्भश्री, पद्म विभूषण दिया हो। टाइम्‍स ने यह ख़बर क्‍यों प्रथम पेज पर नहीं छापी मैं नहीं जानता लेकिन जब हॉकर ने अख़बार डाला तो मैंने टाइम्‍स इसी उम्मीद पर उठाया था कि हबीब तनवीर जैसे महान कलाकार की ख़बर प्र‍थम पेज पर होगी और कुछ दो चार कॉलम विशेष सामग्री भी होगी जिसे देने के लिए टाइम्‍स मशहूर है। लेकिन मेरा भ्रम टूट गया क्‍योंकि टाइम्‍स ने हबीब तनवीर को इस लायक नहीं समझा।
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