रविवार, मार्च 30, 2008

इंिडया टीवी ने पत्रकार को गुंडा क्यों बोला

गुरु हूं तो िप्रंट का लेिकन खबर के िलए कभी.कभी चैनल भी देख लेते हैं। इंिडया टीवी देखा उस पर मीिडया काे गाली दे रही थी एक एंकर। मामला सबको मालूम है िक नाना पाटेकर िफल्म में से तनुश्री को आइटम देना था कुछ कहा सुनी हुइ तनुबाहर। जो जािहर से बात है िक मीिडया तनुश्री से बात तो करेगी। तनु के िपता ने मुंबइ में बाइट ले रहे मीिडयावाले का कैमरा तोड़ िदया। तो जािहर से बात है मीिडया वाले भड़केंगे ही। जब मीिडया ने हर्जाना मांगा तो दुर्व्यवहार िकया गया। इंिडया टीवी ने ये सब िदखाया और हंगामा कर रहे है िरपोटर्स काे गुंडा कहा। क्या इंिडया टीवी छुमंतर िदखाते िदखाते फ्लाप कलाकारों की दलाली भी करने लगा है। एक कैमरामैन का जब कैमरा टूटता है तो हम सब जानते हैं उसे िकतनी जल्दी जुड़वाना पड़ता है। िफर खर्च भी िकतना अाता है। कैमरामैन संस्थान से कर्ज लेकर कैमरा खरीदता है। िजसे संस्थान हर महीने तनख्वाह से काटता है। यह िबन ब्याज की िकस्त चुकाते चुकाते पांच साल तक लग जाते हैं। और इंिडया टीवी पत्रकारों को गुंडा कहता है। अगर उनके िकसी पत्रकार को कोइ गाली भी दे दे तो रजत शर्मा खुद एक घंटे का कार्यक्रम देते हैं। या िफर इंिडया टीवी काे िकसी खबर की जरूरत नहीं उसका जादू टोने और बजरंग बली खली से काम चल जाएगा। ये जादू टोना थोड़ िदन का है। जो भारत की मीिडया में हो रहा है यािन खबरों की कंगाली वह अमेिरका की मीिडया में एक डेढ़ दशक पहले हो चुका है। इसी पर एक िकताब िलखी गइ है। एिलमेंट्स आफ जर्न िलज्मइंिडया टीवी को समझना चािहए िक पत्रकार गुंडे नहीं

गुरुवार, मार्च 27, 2008

३५ साल से काम कर रहाहूँ एडिटर नहीं बना tum २७ साल की उम्र में किसी प्रोडक्ट के हेड केसे बन गए

जो हेडिंग दी है वो देहली के बड़े अखबार के बड़े सम्पादक के है । पिछले दिनों उनसे मिलना हुआ उस दौरान ये बात निकली। मैं ये सोच कर बात कर रहा था कि इतना बड़ा आदमी है। लेकिन sale ने aukaad दिखा दी। यार समझा नही आया कि इतना पुराना आदमी मुझसे अपने को अपने कि तुलना कर रहा है।
मुझे गुस्सा आया फिर गर्व भी हुआ कि इतना बड़ा आदमी मुझसे जल रहा है।
लेकिन मामला जलने का नहीं है। मामला है सोच का वो ३५ साल से ८ घंटे कि जॉब कर रहे है ।
लेकिन ७ साल के कैरियर में मैंने १८-१८ घंटे काम किया है । तब जाकर देश के सबसे तेज़ बढ़ते अख़बार में यहाँ तक आया हूँ। दरअसल इनके जैसे बुजुर्गो ने से सिर्फ़ शाम ४ से रात १० तक ड्यूटी की है। विचारों की पत्रकारिता की है । इन्हे क्या मालूम ख़बर के लिए केसे लड़ा जाता है। और बात करते है केसे कम उम्र में आगे aa गए ।
ये उन युवा मेहनतशील पत्रकारों की दुनिया है जहा हर युवा पत्रकार सुबह ७ से 11 कॉलेज जाता है फिर दिनभर एक ख़बर के लिए पसीना बहाता है । समोसा खा कर दिन kaat लेता है। शाम को फिर प्रेस नोट बँटा है अपनी ख़बर के
आलावा। और या कहते है केसे आगे बढ़ गये। ये बार धर्मेन्द्र चौहान की नही हर युवा की है।
अरे अखबारी दुनिया कितनी तेज़ी से bad रही है। हो सकता है जो maine २६ साल में किया वो कोई २० men ही कर दे।
क्यो की अब सिर्फ़ डीसी या टीसी लगाने से कम नही चलता हर ख़बर के साथ ड्रामा करना पड़ता है।
और ये बोलाते है इतने आगे केसे आगये । ये संदेश है उन बुजुर्गो के लिए है जो युवाको आगे नही बढ़ते देखा
सकते। इस लिए बुजुर्गो ये याद रखो अब हर दूसरा युवा पत्रकार जल्दी ग्रो करने वाला है।
िवरलें भी हैं जो 60 की उम्र में 16 से लगते हैं। इंदौर में िवनय लाखे ऐसे संपादक थे िजनकी उम्र 60 से ज्यादा थी लेिकन उनका काम जवानों जैसा था। ऐसे अनेक संपादक हैं जो 60 के होकर जवान हैं। और युवाओं का पसंद करते हैं।एक ये िदल्ली वाले हैं नाम बडे और दर्शन खोटे।
यार गलितयां शुमार हैं लेिकन माफ कर देना यहां िहंदी टाइप करना थाेडा मुिश्कल लग रहा है।बाकी बात होती रहेगी

मंगलवार, मार्च 11, 2008

फिर ये सवाल क्यों कि कल अख़बार अच्छा निकालना।

बॉस आज दिमाग ख़राब है। जब कोई बोलता है की साहब आ रहे हैं। कल अखबार अचछा निकालना है। मन में खटका किक्या मैं रोज ख़राब अख़बार निकलता हूँ। अगर ये सच है तोमुझे जॉब छोड़ देना चाहिए । लेकिन सच तो ये है कि मैंने कभी भी akhabaरिय jओब नही समझा क्योंकि मैंने परिवार के बाद अगर किसी से प्यार किया तो वो अख़बार है। फिर ये सवाल क्यों कि कल अख़बार अच्छा निकालना। क़म्बखत सब लालागिरी है यार जब ये सोचता हूँ कि जोश से कम किया जाए तो राजनीति बीच मी आ जाती है। लेकिन मैं हारूंगा नहीं अख़बारियत के लिए लड़ता रहूँगा। जब तक काम करूंगा ईमानदारी से काम करूंगा । अभी टाइप करने कि स्पीड काम है । गलतियाँ भी बेशुमार हैं । माफ़ी के काबिल तो हू ही बाकि शुरू हुआ है तो काफिला .

सोमवार, मार्च 10, 2008

आजसे श्री गणेश

आजसे श्री गणेश किया है। ब्लॉग बनाया ही बड़ी मुश्किल से इसलिए थोड़ा मुश्किल हो रहा है.